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“कैसे करूं”

 

 

 

 

 

 

 

 

“कैसे करूं”

 

 

 

शब्दों मे बयान कैसे करूं , दर्दे दिल का कैसे नीबाह करूं ,

जो अश्क का दरिया जम सा गया , आंखों से उसका कैसे बहा करूं ?????????

ना सुकून मिले , ना चैन कहीं , ना दिन हो मेरा ना रैन कहीं ,

अब दिल को क्या समझाऊं मैं , पल पल की बेचनी कहाँ रफा करूं ?????????

सब बिखर गया . सब उजड़ गया , कुछ भी तो मेरे पास नही ,

दिल जल कर ऐसा ख़ाक हुआ , अब क्या लाऊं और क्या तबाह करूं ????????????

तेरी बातों पे तेरे वादों पे बंद आँखों से मैंने क्यों इतना किया यकीन,

तुझे चाहने से भी ज्यादा बढा लगे , अब और ऐसा मैं क्या गुनाह करूं ?????????


 

“क्यों है”

“क्यों है”

तेरे बगेर तनहा जिन्दगी मे मेरी कुछ कमी सी क्यों है ,

तेरी हर बात मेरे जज्बात से आज फ़िर उलझी सी क्यों है…

तु मुझे याद ना आए ऐसा एक पल भी नही संवारा मैंने,

गुजरते इन पलों मे मगर आज फ़िर बेकली सी क्यों है……

बेबसी के लम्हों मे आंसुओं का वो मंजर गुजारा मैंने ,

उठती गिरती पलकों मे मगर आज फ़िर कुछ नमी सी क्यों है………

मोहब्बत मे तेरा नाम लेकर तेरी बेरुखी को भी रुतबा दिया मैंने,

हर एक आहट पे तेरे आने की उम्मीद आज फ़िर बंधी सी क्यों है……….

गिला तुझसे नही बेवफा सिर्फ़ अपनी मज्बुरीयों से किया मैंने,

वक्त से करके तकरार इन सांसों की रफ्तार्र आज फ़िर थमी सी क्यों है……

 

“जरूरी तो है”

जरूरी तो है”

मुजको मिले तेरा प्यार ये जरूरी तो है,
तेरे दिल पे हो मेरा इख्त्यार ये जरूरी तो है,


दर्द कितना भी सताये है, मुजे पर वो तेरा है,

तेरे गम मे हो मेरा दामन तार तार ये जरूरी तो है.


एक पल तेरे बगैर सोचु भी तो मैं कैसे,

हर घड़ी हो तेरा मेरा साथ ये जरूरी तो है


जिसकी झलक पाने को सदयीओं से ये ऑंखें थमी हैं,

मैं करू उसका जिन्दगी भर इंतजार, ये जरूरी तो है.


तू है मेरे सांसों मे मेरी हर नब्ज कहती है,

मैं करूं तुजे हर पल टूट के प्यार ये जरूरी तो है.

ये इंतजार भी तेरा, ये आंसू भी तेरा, ये गम भी तेरा…..

ये प्यार भी तेरा , ये ऐतबार भी तेरा ये………….
फिर क्यों न करूं किस्मत से तकरार , ये जरूरी तो है.

“बहाने से ही आ ”

 

 

 

 

 

 

 

 

“बहाने से ही आ ”

मेरी मोह्हब्ब्त का सिला मुझको मिले कुछ ऐसे ,

 

तुझे पाने की तम्मना मैं जीना दुशवार हो जाए ,

 

आज तू मुझे खाक मे मिलाने के बहाने से ही आ .

 

तेरी यादों का पहरा मेरी धड़कन पे अब ना रहे ,

 

मेरे हाथों से तेरा दामन भी कुछ छुट जाए ऐसे ,

 

आज तू मुझपे इतने सितम ढाने के बहाने से ही आ .

 

इन निगाहों के सिसकते इंतजार बिखर जायें कुछ ऐसे ,

 

की मेरी आंखों की नमी भी छीन जाए मुझसे ,

 

आज तू मुझे यूं बेइन्तहा रुलाने के बहाने से ही आ .

 

ये दिल एक पल मे टूट के बिखर जाए कुछ इस तरह ,

 

की मेरी हर एक आरजू और उम्मीद का जनाजा निकले,

 

आज तू मुझे इस कदर ठुकराने के बहाने से ही आ

“क्षनीकाएं”

 

“तेरा प्यार”

“एक दर्द ,

एक वेदना ,

एक कसक , तड़प ,

और बेशुमार आंसू “

 

 

“तेरी याद”

” वो लम्हे ,

वो गुजरे पल ,

वो अधूरा स्पर्श,

और एक अंतहीन इंतजार “

 


“तेरा साथ”

ये धुंधला साया ,

ये काली परछाई,

लम्बी तनहाई,

और एक अधूरी आस “

 

 


 

“तेरी वफा “

“वो झूठे वादे ,

वो टूटती कस्मे ,

वो बेवजह इल्जाम ,

और मेरा अँधा विश्वास “


‘तेरा वजूद”

“मेरी बोजिल आहें,

मेरी तड़पती बाहें,

मेरी बिख्लती ऑंखें,

और मेरी डूबती सांसें”

 

   

“लिखें हम “


“लिखें हम “
तेरा अफ़साना लिखें हम , तेरा तराना लिखें हम ,
तेरा आना जाना देख , तेरा इतराना लिखें हम .
तेरी पलकों का झुक जाना , कुछ सोच के घबरा जाना ,
तेरा खिल्खीलाना देखें तो, तेरा शर्माना लिखें हम .
तेरी आँखों की मदहोशी , तेरे लबों के खामोशी ,
तेरी बातें जो सुन लें तो , तेरा चह्चाना लिखें हम .
तेरे चेहरे की ये मस्ती , जैसे फूलों की ताजगी ,
तेरी इस बेखुदी मे फ़िर तेरा लहराना लिखें हम .

कभी यूं रूठ के जाना , कभी आँखों मे ही मुस्काना ,
तेरी इस अदा से फ़िर , दिल का बहलाना लिखें हम .
सांसों को महकती तेरी सुबह , दिल को धड़कती तेरी शामें ,
तेरे प्यार मे डूबे दिन रात का एक फसाना लिखें हम .
आज ये दिल चाहे फ़िर तेरा नजराना लिखें हम ,
जो कभी खत्म ना हो तेरा वो खजाना लिखें हम ….

 

 

 

टीस

टीस

लम्हा लम्हा तेरे साये को सीने से लगाया मैंने,
दिल मे उठी टीस को आज फिर समझाया मैंने.

खाव्ब बन कर मेरी आँखों मे समाने वाले,
तेरे यादों की  टीस से महफिल को सजाया मैंने.  

आंशु ठहरे हैं मेरी पलकों पे शबनम की तरेह,
अश्कों मे बसी टीस को दिल भर के रुलाया मैंने.

कौन कहते है तेरे बगैर सिर्फ़ तनहा है हम,
अपने लहू की टीस से तेरे अक्स को  बनाया मैंने.

कोई रात  kutthee नही युगों मे बदल जाती है जब,
टीस से सजी तन्हाई को तेरे कंधे का पता बताया मैंने.

अंधेरों मे जब जब करते हैं ख़ुद से बातें  हम,
मोह्ह्ब्त की टीस को गीतों मे गुनगुनाया मैंने.

क्या शोला क्या चिंगारी ज्लायगी मेरे इस दिल को,
जिस्मोजान मे दबी टीस को तेरे स्पर्श का एहसास कराया
मैंने.

seema gupta

“नहीं”

“नहीं”

“नहीं”
देखा तुम्हें , चाहा तुम्हें ,
सोचा तुम्हें , पूजा तुम्हें,
किस्मत मे मेरी इस खुदा ने ,
क्यों तुम्हें कहीं भी लिखा नहीं .
रखा है दिल के हर तार मे ,
तेरे सिवा कुछ भी नही ,
किस्से जाकर मैं फरियाद करूं,
हमदर्द कोई मुझे दिखता नही.
बनके अश्क मेरी आँखों मे,
तुम बस गए हो उमर भर के लिए ,
कैसे तुम्हें दर्द दिखलाऊं मैं ,
अंदाजे बयान मैंने सीखा नही.

नजरें टिकी हैं हर राह पर ,
तेरा निशान काश मिल जाए कोई,
कैसे मगर यहाँ से गुजरोगे तुम,
मैं तुमाहरी मंजील ही नही,
आती जाती कोई कोई अब साँस है ,
एक बार दिल भर के काश देखूं तुझे,
मगर तू मेरा मुक्कदर नही ,
क्यों दिले नादाँ ये राज समझा नही …………..

 

 

 

 

“काश”

“काश”

“काश”

हर वक्त तुम्हारे होटों पर होती ,

काश मैं वो ग़ज़ल होती ,

जिन फूलों की तुम तारीफ करते ,

काश उन फूलों का तब्बसुम होती.

जिन नज़ारों को तुम आँखों मे बसाते,

काश उन नजारों का नूर होती .

जिसे तुम हर पल पाना चाहते ,

काश मैं ही वो हुर होती .

जिससे तुम्हारे दिल की प्यास बुझती ,

काश मैं वो पैमाना होती ,

जो हर पल तुम्हारी सांसों को मेह्काती ,

काश मैं वो खुशबु होती .

जिसे गवाने का डर तुम्हे हमेशा रहता ,

काश मैं वो तुम्हारी जान होती ,

तुम्हारे सीने मे अगर कुछ धड़कता है ,

काश मैं ही वो तुम्हारा दिल होती .

तन्हाई”

“तन्हाई”

“तन्हाई”

“तन्हाई”

“तन्हाई”

काँटों की चुभन सी क्यों है तन्हाई
सीने की  दुखन  सी  क्यों   है  तन्हाई,

ये  नजरें  जहाँ  तक  मुझको  ले  जांयें ,
हर  तरफ  बसी  क्यों  है  सूनी  सी   तन्हाई

इस  दिल  की  अगन  पहले  क्या  कम  थी ,
मेरे  साथ  सुलगने  लगती  क्यों  है  तन्हाई

आंसू  जो  छुपाने  लगता  हूँ  सबसे ,
बेबाक  हो  रो देती  क्यों   है  तन्हाई

तुझे  दिल  से  भुलाना  चाहता  हूँ ,
यादों के भंवर मे उलझा देती क्यों है तन्हाई 

एक  पल  चैन  से  सोंना  चाहता  हूँ ,
मेरी  आँखों मे जगने लगती क्यों है तन्हाई 

तन्हाई से दूर नही अब रह सकता,

मेरी सांसों  मे,  इन  आहों मे,
मेरी रातों मे,  हर बातों मे,
मेरी आखों मे, इन ख्वाबों मे,
कुछ अपनों मे, कुछ सपनो मे ,
मुझे अपनी सी लगती क्यों है तन्हाई ????

“ऐसा ना हो जाए ”

“ऐसा ना हो जाए ”

कहीं ऐसा ना हो जाए ,

की फ़िर तेरी याद आ जाए ,

पुकारूँ नाम मैं तेरा ,

और तू यूं ही बदनाम हो जाए .

कही ऐसा न हो जाए ,

की फ़िर ये दिल तड़प जाए,

मैं दुंदु हर तरफ तुझको ,

तू कहीं नज़र ही नही आए .

कहीं ऐसा ना हो जाए ,

की तू हर शै मे नज़र आए ,

कहे दुनिया मुझे पागल,

प्यार मे मेरा ये अंजाम हो जाए .

कहीं ऐसा ना हो जाए ,

की फ़िर तेरी प्यास जग जाए ,

मैं जी भी ना सकूं तुझ बिन,

ये जिन्दगी यूं ही तमाम हो जाए .

“यादें”

“यादें”

“यादें”

बहुत रुला जाती हैं , दिल को जला जातीं हैं ,

नीदों मे जगा जाती हैं , कितना तड़पा जातीं हैं ,

“यादें” जब भी आती है ”

भीगे भीगे अल्फाजों को , लबों पर लाकर ,

दिल के जज्बातों को , फ़िर से दोहरा जाती हैं ,

“यादें जब भी आती हैं ”

खाली अन्ध्यारे मन के , हर एक कोने मे ,

बीते लम्हों के टूटे मोती , बिखरा जाती हैं ,


“यादें जब भी आती है ”

हम पे जो गुजरी थी , उन सारी तकलीफों के ,

दिल मे दबे हुए , शोलों को भड़का जाती हैं ,


“यादें जब भी आती हैं ”

कितना सता जाती हैं , दीवाना बना जाती हैं ,

हर जख्म दुखा जाती हैं , फ़िर तन्हा कर जाती हैं ,


“यादें जब भी आती हैं ”

“चले आओ”

चले आओ

 

चले आओ”