“दोषी कौन”
November 28, 2008 by limit
मैं ताज …..
भारत की गरिमा
शानो शौकत की मिसाल
शिल्प की अद्भुत कला
आकाश की ऊँचाइयों को
चूमती मेरी इमारतें ,
शान्ति का प्रतीक …
आज आंसुओं से सराबोर हूँ
मेरा सीना छलनी
जिस्म यहाँ वहां बिखरा पढा
आग की लपटों मे तडपता हुआ,
आवाक मूक दर्शक बन
अपनी तबाही देख रहा हूँ
व्यथित हूँ व्याकुल हूँ आक्रोशित हूँ
मुझे कितने मासूम निर्दोष लोगों की
कब्रगाह बना दिया गया…
मेरी आग में जुल्स्ती तडपती,
रूहें उनका करुण रुदन ,
क्या किसी को सुनाई नही पढ़ता..
क्या दोष था मेरा ….
क्या दोष था इन जीवित आत्माओं का …
अगर नही, तो फ़िर दोषी कौन….
दोषी कौन, दोषी कौन, दोषी कौन?????
Posted in "poems", HINDI POETRY, kavita, love, love songs, mohabbat, pain, sad song, sher, yaden, कविता, प्यार | Tagged burning taj, global warning, mumbai taj attack, terror | 6 Comments
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उन्होंने भारत को जंग में हरा ही दिया
अपने ड्राइंग रूम में बैठ कर भले ही कुछ लोग इस बात पर मुझसे इत्तेफाक न रखे मुझसे बहस भी करें लेकिन ये सच है उन्होंने हमें हरा दिया, ले लिया बदला अपनी…
hey very nice . very well said and written. too good. please also visit my poems at my blog – http://www.creations-to-be.blogspot.com/
thanks, rashi
मैं आपके विचारो से सहमती रखता हूँ और शायद इसका जवाब देना इतना आसान नही होगा.
http://jhankar.wordpress.com/
aap ki kavitao may sahaj manviya smvaidanao ki jhalak hai .
well written
shandaar