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Archive for October, 2008

“शायद”

“शायद”

ये उसकी आहट का शायद धुआं होगा,
बर्फीले होते जिस्म से जिसका गुजर हुआ होगा,
मौत की रगों मे सांसों का लहू शिरकत न करता,
उसके अश्कों ने यकीनन मेरे लबो को छुआ होगा.

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