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Archive for August, 2008

फिर वही आतिशफिशानी कर रही उसकी अदा
फिर वही मदिरा पिला डाली है उसके जाम ने ……….
जब भी गुज़रा वो हसीं पैकर मेरे इतराफ़ से
दी सदा उसको हर एक दर ने हर एक बाम ने……
एक अजब खामोश सा एहसास था दिल में मेरे
उसका नज़ारा किया है पहले हर इक गाम ने…

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मेरे एहसास में तू रहती है,
मेरे जज्बात में तू रहती है
आँखों मे सपना की जगह
मेरे ख़यालात में तू रहती है
लोग समझते हैं के वीराना है
पर मेरे साथ में तू रहती है
दम घुटता है जब रुसवाई मे ,
मेरी हर साँस मे तू रहती है
दुख का दर्पण , विरहन सा मन
मेरे हर हालात [...]

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“क्या हुआ जो ये रात,
“कुछ”
शिकवो शिकायतों के साथ गुजरी ,
क्या हुआ जो अगर ये रात,
आंसुओ के सैलाब से बह कर गुजरी ,
“गौर -ऐ -तलब” है के ये रात,
आप के ख्यालात के साथ गुजरी

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आप की यादों का काफिला,
कुछ इस तरह से,
मेरे साथ चलता है,
” की”
आप से हर रोज
मुलाकात हो जाती है

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“इल्जाम ले लो”

“इल्जाम ले लो”

ज़ब्त से कुछ काम ले लो,

ख़ुद पे यह इल्जाम ले लो…

जिसका डर था हो न जाए,

उसको अपने नाम ले लो .

कुछ नशा है उखडा उखडा,

आओ हम से जाम ले लो …

गिर न जाएं देखना तुम ,

अपने हाथों थाम ले लो…

नाम मेरा क्या करोगी ,

आशिके बदनाम ले लो [...]

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