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Archive for May, 2008

“क्यों है”

“क्यों है”

तेरे बगेर तनहा जिन्दगी मे मेरी कुछ कमी सी क्यों है ,
तेरी हर बात मेरे जज्बात से आज फ़िर उलझी सी क्यों है…
तु मुझे याद ना आए ऐसा एक पल भी नही संवारा मैंने,
गुजरते इन पलों मे मगर आज फ़िर बेकली सी क्यों है……
बेबसी के लम्हों मे आंसुओं का वो मंजर गुजारा मैंने [...]

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“अब और”

“अब और”
आँखों की गहराई मे आंसू कहीं दफ़न हो जाया करें ,
हर पल बरस कर सर-ऐ-महफिल तमाशा अब और बनाया ना करें .
अधूरी कहानी , प्यार का अफसाना कुछ भी मेरी ख्वावीश ना बने,
मोहब्बत की बातें मेरी तन्हाईयों को तन्हा अब और कर जाया ना करें.

कौन सी कयामत से गुजरा नही अब [...]

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