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Archive for April, 2008

   

“लिखें हम “

“लिखें हम “
तेरा अफ़साना लिखें हम , तेरा तराना लिखें हम ,
तेरा आना जाना देख , तेरा इतराना लिखें हम .
तेरी पलकों का झुक जाना , कुछ सोच के घबरा जाना ,
तेरा खिल्खीलाना देखें तो, तेरा शर्माना लिखें हम .
तेरी आँखों की मदहोशी , तेरे लबों के खामोशी ,
तेरी बातें [...]

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“नहीं”

“नहीं”
देखा तुम्हें , चाहा तुम्हें ,
सोचा तुम्हें , पूजा तुम्हें,
किस्मत मे मेरी इस खुदा ने ,
क्यों तुम्हें कहीं भी लिखा नहीं .
रखा है दिल के हर तार मे ,
तेरे सिवा कुछ भी नही ,
किस्से जाकर मैं फरियाद करूं,
हमदर्द कोई मुझे दिखता नही.
बनके अश्क मेरी आँखों मे,
तुम बस गए हो उमर भर [...]

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“काश”

“काश”
हर वक्त तुम्हारे होटों पर होती ,
काश मैं वो ग़ज़ल होती ,
जिन फूलों की तुम तारीफ करते ,
काश उन फूलों का तब्बसुम होती.
जिन नज़ारों को तुम आँखों मे बसाते,
काश उन नजारों का नूर होती .
जिसे तुम हर पल पाना चाहते ,
काश मैं ही वो हुर होती .
जिससे तुम्हारे दिल की प्यास बुझती , [...]

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“ऐसा ना हो जाए ”

“ऐसा ना हो जाए ”
कहीं ऐसा ना हो जाए ,
की फ़िर तेरी याद आ जाए ,
पुकारूँ नाम मैं तेरा ,
और तू यूं ही बदनाम हो जाए .
कही ऐसा न हो जाए ,
की फ़िर ये दिल तड़प जाए,
मैं दुंदु हर तरफ तुझको ,
तू कहीं नज़र ही नही आए .
कहीं ऐसा ना हो [...]

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“यादें”

“यादें”
बहुत रुला जाती हैं , दिल को जला जातीं हैं ,
नीदों मे जगा जाती हैं , कितना तड़पा जातीं हैं ,
“यादें” जब भी आती है ”
भीगे भीगे अल्फाजों को , लबों पर लाकर ,
दिल के जज्बातों को , फ़िर से दोहरा जाती हैं ,
“यादें जब भी आती हैं ”
खाली अन्ध्यारे मन के , [...]

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चले आओ

 

“चले आओ”

आज फिर दिल तुझे याद किए है
                  
“चले आओ”
आज फिर हर एक फरियाद लिए हैं
“चले आओ”
हर तरफ़ मायूसियों से घिरे साए हैं
आज फिर ये दिल परेशान किए है
“चले आओ”
हर एक चोट सिसक कर उभर आई है
आज फिर हर ज़ख़्म से लहू बहे है “
“चले आओ”
ये दिल बेआस, हर निगाह में [...]

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“खत”

“खत”
आज लहू का कतरा कतरा स्याई बना है,
और ये जख्मी दिल ही खत की लिखाई बना है.
दर्द बडा बेदर्द है, वो ही गवाही बना है,
तार- तार हर दिल कौना तबाही बना है.
देख मेरे चाहत का किस्सा जग हंसाई बना है,
मेरे बर्बादी का सारा ही जहाँ तमाशाई बना है.
नाम वफा था जिसका वो ही बेवफाई [...]

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मृगतृष्णा

कैसी ये मृगतृष्णा मेरी
ढूँढ़ा तुमको तकदीरों में
चन्दा की सब तहरीरों में
हाथों की धुँधली लकीरों में
मौजूद हो तुम मौजूद हो तुम
इन आखों की तस्वीरों में
कैसी ये ………………….
अम्बर के झिलमिल तारों में
सावन में रिमझिम फुहारों में
लहरो के उजले किनारों में
तुमको पाया तुमको पाया
प्रेम-विरह अश्रुधारों मे
कैसी ये…………………….
ढूँढ़ा तुमको दिन रातो में
ख्वाबों ख्यालों जज्बातों में
उलझे से कुछ [...]

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“ग़ज़ल”

“ग़ज़ल”

 
तेरी बातों पे ना जाने मुझे क्यों प्यार आता है,
तुझे देखूं ना मैं जब तक नही करार आता है.
तेरी आँखों से यूं लगता है जैसे कोई जाम पीता हूँ,
खुले होठों से गिरते फूलों को मैं थाम लेता हूँ.
नींद आती नही मुझको तो हर पल ख्वाब आतें हैं,
ख्वाबों मे मैं तुझे हर पल [...]

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“हवा”

ये हवा कुछ ख़ास है, जो तेरे आस पास है,

मुझे छू, मेरा एहसास कराने चली आई ये हवा।
सारी रात मेरे साथ आँसुओं में नहाके,

मेरे दर्द की हर ओस को मुझसे चुराके,
मेरे ज़ख़्मों का हिसाब तेरे पास लाई ये हवा,
 
ख़ामोश तन्हा से अफ़सानों को अपने लबों पे लाके,

मेरे मुरझाते चेहरे की चमक को मुझसे छुपाके,

भीगे अल्फ़ाज़ों [...]

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